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How to Increase Cibil Score Instantly? | Credit Score Kaise Badhaye

CIBIL SCORE कैसे बढ़ाये

CIBIL SCORE कैसे बढ़ाये

अपना क्रेडिट स्कोर समझें और सुधारें

आपका CIBIL स्कोर क्यों कम है?

दोस्तों, अगर आपको लोन या क्रेडिट कार्ड आपके CIBIL स्कोर कम होने की वजह से नहीं मिल पा रहा है, तो यह गाइड आपके लिए है। बाजार में बहुत से ऐप्स CIBIL स्कोर बढ़ाने का प्लान बेच रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कोई भी ऐप या वेबसाइट आपका CIBIL स्कोर नहीं बढ़ा सकता। आपका स्कोर केवल आपके और बैंक के बीच के लेन-देन पर निर्भर करता है। यह गाइड आपको उन 6 बड़े कारणों के बारे में बताएगी जो आपके स्कोर को कम करते हैं, और आप उन्हें मुफ़्त में कैसे सुधार सकते हैं।

1. क्रेडिट हिस्ट्री (Credit Age)

आपकी क्रेडिट हिस्ट्री या 'क्रेडिट एज' आपके CIBIL स्कोर में एक बहुत महत्वपूर्ण फैक्टर है। यह मापता है कि आप कितने समय से क्रेडिट (जैसे क्रेडिट कार्ड या लोन) का उपयोग कर रहे हैं। जितना पुराना आपका क्रेडिट खाता होगा, उतना ही वह आपके स्कोर के लिए बेहतर माना जाता है।

क्या होता है जब आप पुराना कार्ड बंद करते हैं?

मान लीजिए आपके पास 4 कार्ड हैं: एक 5 साल पुराना और तीन 1-1 साल पुराने। अगर आप कम लिमिट या कम बेनिफिट की वजह से 5 साल पुराना कार्ड बंद कर देते हैं, तो आपकी 'एवरेज क्रेडिट एज' 5 साल से घटकर सिर्फ 1 साल रह जाती है। इससे आपका स्कोर 15-40 पॉइंट्स तक कम हो सकता है, क्योंकि बैंकों को लगता है कि आपका क्रेडिट बिहेवियर नया और अनुभवहीन है।

💡 समाधान:

आपका जो भी सबसे पुराना क्रेडिट कार्ड है, चाहे उसकी लिमिट कम हो, उसे बंद न करें। उसे साल में एक-दो बार छोटा-मोटा इस्तेमाल करते रहें ताकि वह एक्टिव रहे। यही कार्ड आपकी Credit Age बढ़ाता है और आपका CIBIL स्कोर मज़बूत करता है।

2. मल्टीपल इन्क्वायरी (Multiple Enquiries)

जब आप बार-बार या कम समय में कई जगह लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, तो हर बार बैंक या लेंडर आपकी CIBIL रिपोर्ट चेक करता है। इस प्रोसेस को 'Hard Enquiry' कहते हैं। कम समय में बहुत ज़्यादा हार्ड इन्क्वायरी आपके CIBIL स्कोर पर बहुत नकारात्मक असर डालती हैं।

"क्रेडिट हंगरी" बिहेवियर

अगर CIBIL को दिखता है कि आपने 15 दिन में 5-7 जगह लोन अप्लाई किया है, तो उन्हें लगता है कि आप 'Credit Hungry' (क्रेडिट के भूखे) हैं या किसी आर्थिक दबाव में हैं। इसे एक हाई-रिस्क साइन माना जाता है। हर Hard Enquiry पर आपका स्कोर 5-10 पॉइंट गिर सकता है, जिससे कुल 30 से 70 पॉइंट्स तक का नुकसान हो सकता है।

💡 समाधान:

अगर आपका CIBIL स्कोर पहले से ही कम है, तो कम से कम 6 महीने तक कोई भी नया लोन या क्रेडिट कार्ड अप्लाई करने से बचें। जब तक बहुत ज़रूरी न हो, अपनी एलिजिबिलिटी चेक न करें।

3. पेमेंट हिस्ट्री (Payment History)

यह आपके CIBIL स्कोर का दिल (Heart) है। यह आपके क्रेडिट स्कोर की नींव है। पेमेंट हिस्ट्री का मतलब है कि आपने अपनी EMI, क्रेडिट कार्ड बिल, या लोन इंस्टॉलमेंट का पेमेंट कितनी रेगुलर और समय पर किया है। यह एक सबसे बड़ा फैक्टर है जो आपके स्कोर पर असर डालता है।

एक दिन की देरी का असर

अगर आप एक दिन भी EMI लेट करते हैं, तो बैंक लेट फी लगाता है। लेकिन अगर आप 1 महीना लेट करते हैं, तो बैंक इसे CIBIL को रिपोर्ट कर देता है। CIBIL आपके नाम के सामने "Late Payment" का रिमार्क लगा देता है। इस एक रिकॉर्ड से आपका CIBIL स्कोर 60-100 पॉइंट्स तक गिर सकता है। यह रिमार्क आपके रिकॉर्ड में 7 साल तक रह सकता है।

💡 समाधान:

  • हमेशा अपनी Due Date याद रखें; मोबाइल कैलेंडर में रिमाइंडर सेट करें।
  • पेमेंट मिस न हो इसके लिए Auto Debit या Standing Instruction लगाएँ।
  • "Minimum Due" भरने की गलती न करें; हमेशा पूरा बिल चुकाने की कोशिश करें।
  • अगर डिफॉल्ट या सेटलमेंट कर लिया, तो लोन लेना बहुत मुश्किल हो जाता है।

4. हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन (High Credit Utilization)

क्रेडिट यूटिलाइजेशन का मतलब है कि आप अपनी कुल क्रेडिट लिमिट में से कितना पैसा इस्तेमाल कर रहे हैं। यह आपके CIBIL स्कोर पर सीधे असर डालता है। अगर आपकी लिमिट ₹1 लाख है और आप ₹80,000 खर्च कर लेते हैं, तो आपका यूटिलाइजेशन 80% हुआ।

30% का नियम

बैंक और CIBIL की नज़र में, 30% से कम यूटिलाइजेशन को सबसे अच्छा माना जाता है। अगर आप बार-बार 70-80% तक लिमिट इस्तेमाल करते हैं, तो बैंक को लगता है कि आप फाइनेंसियल प्रेशर में हैं। इससे आपका CIBIL स्कोर 40-60 पॉइंट्स तक गिर सकता है।

💡 समाधान:

  • हमेशा अपनी कुल क्रेडिट लिमिट का 30% से ज़्यादा खर्च न करने की कोशिश करें।
  • अगर खर्च ज़्यादा है, तो बैंक से अपनी लिमिट बढ़वाने की रिक्वेस्ट करें।
  • बिल जनरेट होने से पहले कुछ पेमेंट करके यूटिलाइजेशन कम कर सकते हैं।

5. क्रेडिट मिक्स (Credit Mix)

क्रेडिट मिक्स का मतलब है कि आपके पास किस-किस तरह के लोन हैं। दो तरह के लोन होते हैं: 'Secured Loan' (जैसे होम लोन, कार लोन) और 'Unsecured Loan' (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड)। CIBIL एक बैलेंस्ड पोर्टफोलियो देखना पसंद करता है।

रिस्की पोर्टफोलियो

हेल्दी पोर्टफोलियो

बैलेंस क्यों ज़रूरी है?

अगर आपके पास सिर्फ Unsecured Loans हैं (जैसे 2 क्रेडिट कार्ड और 1 पर्सनल लोन), तो इसे एक रिस्की पोर्टफोलियो माना जाता है। क्योंकि इसमें बैंक के पास आपके खिलाफ कोई सिक्योरिटी नहीं होती। अगर आपके पास Secured और Unsecured लोन का अच्छा बैलेंस है, तो आपका स्कोर ज़्यादा स्थिर और हेल्दी रहता है।

💡 समाधान:

सिर्फ क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन पर निर्भर न रहें। अपने पोर्टफोलियो में एक सिक्योर्ड लोन (जैसे बाइक लोन या FD के बदले छोटा लोन) शामिल करने से आपका क्रेडिट मिक्स सुधरता है और स्कोर 20-40 पॉइंट्स तक बेहतर हो सकता है।

6. को-साइन, गारंटर और जॉइंट अकाउंट्स

यह एक ऐसा टॉपिक है जिसे बहुत लोग अनदेखा कर देते हैं, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा होता है। जब आप किसी और के लोन में Co-applicant, Guarantor, या Joint Account Holder बनते हैं, तो उस अकाउंट की पूरी जिम्मेदारी आपकी भी होती है।

जोखिम का कनेक्शन

👤

दोस्त का लोन

❌ डिफॉल्ट हुआ

🔗
🙋‍♂️

आपका CIBIL

🔻 50-100 पॉइंट्स गिरे

दूसरे की गलती, आपकी सज़ा

मान लीजिए आपने अपने दोस्त के ₹5 लाख के लोन में गारंटर बन गए। अगर आपके दोस्त ने EMI टाइम पर नहीं भरी या डिफॉल्ट कर दिया, तो वो "Late Payment" या "Default" का रिमार्क आपके CIBIL रिपोर्ट में भी दिखेगा। भले ही आपने एक रुपया इस्तेमाल न किया हो, फिर भी आपका स्कोर 50-100 पॉइंट्स तक गिर सकता है!

💡 समाधान:

  • गारंटर बनने से पहले 10 बार सोचें। सिर्फ उसी के लिए बनें जिस पर पूरा भरोसा हो।
  • अगर आप को-एप्लीकेंट हैं, तो उस लोन की EMI का मंथली ट्रैक रखें।
  • कोशिश करें कि किसी के लोन में गारंटर या को-एप्लीकेंट न बनें।

अंतिम सलाह

दोस्तों, CIBIL स्कोर बढ़ाने के लिए आपको किसी paid app या जादू के फॉर्मूले की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ अपना पेमेंट समय पर करें, 30% से कम लिमिट इस्तेमाल करें, और बार-बार लोन के लिए अप्लाई न करें। अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो 3 से 6 महीने में आपका CIBIL स्कोर खुद-ब-खुद सुधरने लगेगा।

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