पुतिन की भारत यात्रा 2025: व्यापार, ऊर्जा और रक्षा पर बड़ी डील्स
पुतिन की भारत यात्रा 2025: व्यापार, ऊर्जा और रक्षा पर नई डील्स की पूरी डिटेल
पुतिन की भारत यात्रा कब और क्यों हुई?
व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर की शाम नई दिल्ली पहुंचे और यह यात्रा 5 दिसंबर 2025 तक चली। यह 2021 के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है और ऐसे समय पर हुई है जब यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंध और ऊर्जा संकट ने वैश्विक राजनीति को बदल दिया है।
इस दौरे का मुख्य मकसद भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी को नया दिशा देना, व्यापार बढ़ाना और रक्षा तथा ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना था।
यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम
- पालम एयरफ़ोर्स स्टेशन पर आगमन और औपचारिक स्वागत
- राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात
- राजघाट पर महात्मा गाँधी स्मारक पर पुष्पांजलि
- हैदराबाद हाउस में मोदी–पुतिन शिखर वार्ता और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक
भारत–रूस संबंध क्यों खास हैं?
भारत और रूस के बीच संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा मिला हुआ है, जिसकी शुरुआत 2000 की रणनीतिक साझेदारी घोषणा से मानी जाती है।
2025 में यह साझेदारी 25 साल के अहम पड़ाव पर पहुँची है और वार्षिक शिखर सम्मेलन इसका सबसे बड़ा मंच है।
ट्रेड और इकोनॉमी: 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
दोनों देशों ने आपसी व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। भारत चाहता है कि ट्रेड संतुलित हो, यानी सिर्फ़ रूसी आयात नहीं बल्कि भारतीय निर्यात भी तेज़ी से बढ़े।
इसी मकसद से “India–Russia Economic Cooperation 2030” नाम का कार्यक्रम लॉन्च किया गया, जिसमें इंडस्ट्री, हाई‑टेक, फार्मा, डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स को फोकस में रखा गया है।
ऊर्जा डील: ‘Uninterrupted Fuel Supply’
पुतिन ने भारत को सस्ता और नियमित कच्चा तेल व गैस सप्लाई जारी रखने का भरोसा दिया, जिसे उन्होंने “uninterrupted fuel shipment” कहा।
भारत ने साफ कहा कि उसकी तेल कंपनियां बाज़ार कीमत, लॉजिस्टिक्स और प्रतिबंधों की स्थिति देखकर व्यावसायिक आधार पर निर्णय लेंगी, यानी ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिमी दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी रहेगी।
डिफेंस कोऑपरेशन: मेक‑इन‑इंडिया पर फोकस
शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग मुख्य एजेंडा रहा। दोनों देशों ने तय किया कि आगे ध्यान केवल हथियार खरीदने पर नहीं, बल्कि संयुक्त रिसर्च, डेवलपमेंट और भारत में उत्पादन पर होगा।
रूसी मूल के हथियारों के स्पेयर पार्ट्स और कंपोनेंट्स भारत में मेक‑इन‑इंडिया मॉडल के तहत बनाने पर भी सहमति बनी, ताकि भारतीय सेनाओं की निर्भरता कम हो और भविष्य में तीसरे देशों को निर्यात के अवसर भी खुलें।
अन्य अहम समझौते: मजदूर, उर्वरक, हेल्थकेयर
भारत और रूस के बीच कुल 16 समझौते/एमओयू पर हस्ताक्षर हुए जिनमें उर्वउर्वरक आपूर्ति, समुद्री परिवहन, हेल्थकेयर, शिक्षा, मीडिया और कस्टम्स सहयोग जैसे सेक्टर शामिल हैं।
एक अहम रोडमैप श्रमिक गतिशीलता पर है, जिसके तहत भारतीय कामगारों और प्रोफेशनलों के लिए रूस में नए रोज़गार और स्किल‑आधारित अवसर खोलने पर दोनों देश साथ काम करेंगे।
यूक्रेन युद्ध और भू‑राजनीतिक संदेश
बातचीत के दौरान भारत ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान, संवाद और कूटनीति पर ज़ोर दिया, जबकि रूस ने भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की।
संयुक्त बयान में कहा गया कि कठिन वैश्विक माहौल और बाहरी दबावों के बावजूद भारत–रूस संबंध मजबूत और टिकाऊ बने हुए हैं, जो दोनों देशों की रणनीतिक स्वायत्तता को दिखाता है।
2030 तक का रोडमैप: आगे क्या?
“Economic Cooperation 2030” और रक्षा‑ऊर्जा समझौतों के ज़रिए दोनों देश ट्रेड, टेक्नोलॉजी, स्पेस, आर्कटिक और डिजिटल इकोनॉमी में साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं।
चुनौती यह है कि भारत को पश्चिमी देशों के साथ संबंध, रूस पर लगे प्रतिबंध, पेमेंट सिस्टम और शिपिंग‑इंश्योरेंस जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अपने दीर्घकालिक हितों के हिसाब से संतुलित रास्ता चुनना होगा।

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