IndiGo फ्लाइट कैंसिल? DGCA रूल्स, रिफंड और मुआवज़ा की पूरी गाइड
IndiGo फ्लाइट कैंसिल हो गई? घबराएं नहीं! अपने अधिकार, रिफंड प्रोसेस और स्मार्ट टिप्स की पूरी गाइड
इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल हो जाए तो ज्यादतर लोग घबराकर जो भी ऑफर मिल जाए उसी पर राज़ी हो जाते हैं, जबकि DGCA के नियम आपके फेवर में काफी स्ट्रॉन्ग हैं।[web:1][web:46] इस गाइड में स्टेप–बाय–स्टेप जानेंगे कि आपको कौन–कौन से अधिकार मिलते हैं, रिफंड और मुआवज़ा कैसे क्लेम करें और आगे ऐसी स्थिति में नुकसान से कैसे बचें।[web:5][web:8]
1. IndiGo कैंसिलेशन क्राइसिस में क्या हो रहा है?
हाल ही में क्रू और ऑपरेशनल इश्यूज़ के कारण IndiGo ने बड़ी संख्या में फ्लाइट्स कैंसिल और रीस्ड्यूल की हैं, जिसकी वजह से देशभर के कई एयरपोर्ट पर यात्रियों को लंबी लाइनें और अचानक प्लान बदलने की परेशानी झेलनी पड़ी।[web:16][web:38] इसके बाद DGCA और सिविल एविएशन मंत्रालय ने एयरलाइन से डिटेल्ड रिपोर्ट, सुधार योजना और यात्रियों के लिए राहत उपायों की जानकारी मांगी है।[web:20][web:23]
सरकार ने निर्देश दिया है कि कैंसिल हुई फ्लाइट्स के रिफंड समय पर ऑटोमेटिकली प्रोसेस हों, और जहां ज़रूरी हो वहां होटल, भोजन और बेसिक कंफर्ट की व्यवस्था भी की जाए।[web:18][web:38]
2. DGCA के हिसाब से आपके बेसिक अधिकार
भारत में फ्लाइट कैंसिलेशन और डिले के मामले में आपके अधिकार DGCA की Civil Aviation Requirements और Ministry of Civil Aviation की Passenger Charter में डिफाइन किए गए हैं।[web:1][web:46] ये नियम सभी शेड्यूल्ड एयरलाइंस पर लागू होते हैं, यानी IndiGo के साथ–साथ बाकी घरेलू एयरलाइंस पर भी।[web:12][web:21]
- समय पर सूचना का अधिकार: एयरलाइन को कैंसिलेशन या बड़े बदलाव की जानकारी पहले से देना जरूरी है, आम तौर पर 14 दिन से पहले सूचना हो तो मुआवज़ा जरूरी नहीं होता।[web:5][web:46]
- रिफंड या अल्टरनेट फ्लाइट: फ्लाइट कैंसिल होने पर आपको या तो फुल रिफंड या आपकी सहमति से अल्टरनेट फ्लाइट ऑफर करनी होती है।[web:1][web:5]
- मुआवज़ा: अगर एयरलाइन की प्लानिंग या मैनपावर जैसी वजहों से फ्लाइट कैंसिल हो और समय पर सूचना न मिले, तो आपको अतिरिक्त फाइनेंशियल मुआवज़े का अधिकार होता है।[web:5][web:8]
3. कब मिलता है सिर्फ रिफंड, और कब एक्स्ट्रा मुआवज़ा?
3.1 अगर 14 दिन से ज्यादा पहले सूचना मिले
यदि इंडिगो आपकी फ्लाइट कैंसिल करके कम से कम दो हफ्ते पहले सूचना दे देती है, तो वे या तो फ्री अल्टरनेट फ्लाइट दे सकती हैं या फुल रिफंड प्रोसेस कर सकती हैं, इस स्थिति में मुआवज़ा अनिवार्य नहीं होता।[web:5][web:21]
3.2 अगर 14 दिन से कम, लेकिन 24 घंटे से ज्यादा पहले पता चले
इस केस में एयरलाइन को ऐसी अल्टरनेट फ्लाइट ऑफर करनी चाहिए, जिसका समय आपके ओरिजिनल डिपार्चर के आसपास हो ताकि आपका प्लान कम से कम डिस्टर्ब हो।[web:5] अगर ऑफर आपके काम का न हो या बहुत इनकन्विनियेंट हो, तो आप फुल रिफंड चुन सकते हैं।[web:5][web:8]
3.3 अगर आखिरी समय पर या बिना नोटिस के कैंसिल हो जाए
अगर आपको मैसेज या ईमेल समय पर नहीं मिला और आप एयरपोर्ट जाकर कैंसिलेशन के बारे में जानते हैं, तो यह आपकी पोज़िशन को मजबूत बनाता है।[web:5][web:8] ऐसे में आपको फुल रिफंड के साथ–साथ फाइनेंशियल मुआवज़ा, और कई मामलों में भोजन या होटल जैसी सुविधाएं दिलाने की जिम्मेदारी भी एयरलाइन की होती है।[web:5][web:38]
4. DGCA के हिसाब से मुआवज़ा कितना होता है?
DGCA के नियम मुआवज़े को फ्लाइट की अवधि यानी ब्लॉक टाइम के आधार पर तय करते हैं, और यह अमाउंट आपके बेसिक फेयर और फ्यूल चार्ज से लिंक्ड होता है।[web:5][web:21]
| फ्लाइट का ब्लॉक टाइम | अधिकतम मुआवज़ा (जो कम हो) |
|---|---|
| 1 घंटे तक | ₹5,000 तक या बुक्ड वन–वे बेसिक फेयर + फ्यूल चार्ज।[web:5][web:21] |
| 1–2 घंटे | ₹7,500 तक या बुक्ड वन–वे बेसिक फेयर + फ्यूल चार्ज।[web:5][web:21] |
| 2 घंटे से ज्यादा | ₹10,000 तक या बुक्ड वन–वे बेसिक फेयर + फ्यूल चार्ज।[web:5][web:21] |
कुछ परिस्थितियों में, जब अल्टरनेट फ्लाइट बहुत देर से ऑफर की जाती है और आप उसे स्वीकार नहीं करते, तो फुल रिफंड के साथ बेसिक फेयर और फ्यूल चार्ज के कई गुना तक मुआवज़ा भी लागू हो सकता है, लेकिन उस पर एक ऊपरी लिमिट होती है।[web:5] मौसम, सुरक्षा खतरे जैसी एक्स्ट्राऑर्डिनरी सिचुएशन को आमतौर पर मुआवज़े से बाहर रखा जाता है, जबकि क्रू या प्लानिंग से जुड़ी समस्याएं सामान्यत: एयरलाइन की जिम्मेदारी मानी जाती हैं।[web:5][web:8]
5. IndiGo से रिफंड कैसे लें? (स्टेप–बाय–स्टेप)
5.1 अगर टिकट सीधे IndiGo की वेबसाइट या ऐप से लिया है
- IndiGo की वेबसाइट या ऐप खोलें और “Manage Booking / View Booking” सेक्शन में जाएं।[web:6][web:21]
- PNR और लास्ट नेम डालकर अपनी बुकिंग ओपन करें; अगर फ्लाइट कैंसिल है तो वहां रिफंड या चेंज का ऑप्शन दिखेगा।[web:6]
- आप चाहें तो अल्टरनेट फ्लाइट चुन सकते हैं, वरना “Full Refund to Original Payment Mode” जैसा ऑप्शन सिलेक्ट करें।[web:6][web:21]
- कन्फर्मेशन स्क्रीन और ईमेल का स्क्रीनशॉट ज़रूर सेव रखें, ताकि बाद में किसी विवाद की स्थिति में प्रूफ रहे।[web:5]
हाल की स्थिति में सरकार ने निर्देश दिया है कि कैंसिल हुई फ्लाइट्स के रिफंड तय समय सीमा के भीतर ऑटोमेटिकली प्रोसेस किए जाएं और यात्रियों से दोबारा चार्ज न लिया जाए।[web:18][web:38]
5.2 अगर टिकट किसी ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल से लिया है
अगर आपने टिकट MakeMyTrip, Yatra, ixigo जैसे पोर्टल या ऑफलाइन एजेंट से लिया है, तो IndiGo सीधे आपके अकाउंट में नहीं, पहले एजेंट/पोर्टल को रिफंड भेजती है।[web:5][web:21] इसलिए रिफंड के लिए आपको उसी पोर्टल के कस्टमर सपोर्ट पर रिक्वेस्ट डालनी होगी और साफ लिखना होगा कि आप फुल रिफंड चाहते हैं, न कि केवल वॉलेट क्रेडिट।[web:5]
5.3 कौन–कौन से चार्ज वापस मिलने चाहिए?
DGCA के अनुसार रिफंड में सिर्फ बेसिक फेयर ही नहीं, बल्कि Passenger Service Fee, ADF/UDF और लागू टैक्सेज़ भी शामिल होने चाहिए।[web:1][web:5] अगर कोई एजेंट या एयरलाइन इन चार्जेज़ को काटने की कोशिश करे, तो आप नियमों का हवाला देकर पूरा अमाउंट मांग सकते हैं।[web:1][web:5]
6. अगर IndiGo नियम नहीं मान रही हो तो क्या करें?
6.1 पहले एयरलाइन के साथ लिखित बातचीत
सबसे पहले IndiGo कस्टमर केयर, ईमेल और सोशल मीडिया (जैसे X/Twitter) पर अपना PNR, फ्लाइट डिटेल और समस्या लिखकर आधिकारिक शिकायत दर्ज करें।[web:8][web:18] मैसेज में साफ लिखें कि आप DGCA के संबंधित नियमों के तहत रिफंड और मुआवज़ा क्लेम कर रहे हैं और उनसे लिखित जवाब मांगें।[web:5][web:8]
6.2 AirSewa पोर्टल पर शिकायत
Ministry of Civil Aviation का AirSewa पोर्टल यात्रियों की शिकायतें दर्ज करने के लिए बनाया गया है, जहाँ से मामले संबंधित एयरलाइन और अथॉरिटी तक भेजे जाते हैं।[web:19][web:22] आप वेबसाइट या ऐप के जरिए फ्लाइट कैंसिलेशन, रिफंड में देरी, मिसहैंडल्ड बैगेज जैसी शिकायतें सबूतों के साथ अपलोड कर सकते हैं।[web:19]
6.3 Consumer Court का ऑप्शन
अगर एयरलाइन और रेगुलेटर लेवल पर भी संतोषजनक हल न मिले या आपका फाइनेंशियल लॉस काफी ज्यादा हो, तो आप Consumer Protection Act के तहत कंज्यूमर कमीशन में केस फाइल कर सकते हैं।[web:8] इसमें आप रिफंड के साथ–साथ एक्स्ट्रा खर्च, मेंटल हानि और केस खर्च की भरपाई भी मांग सकते हैं।[web:8]
7. अपने केस के लिए सबूत कैसे तैयार रखें?
किसी भी क्लेम या शिकायत की सफलता काफी हद तक आपके पास मौजूद डॉक्यूमेंटेशन पर निर्भर करती है, इसलिए शुरुआत से ही सबूत इकट्ठा करना जरूरी है।[web:5][web:8]
- ई–टिकट और PNR की कॉपी या स्क्रीनशॉट।[web:5]
- SMS और ईमेल, खासकर वे जिनमें कैंसिलेशन या री–शेड्यूलिंग की सूचना और टाइम–स्टैम्प दिखता हो।[web:5][web:8]
- एयरपोर्ट पर मिला बोर्डिंग पास, काउंटर स्लिप, फूड वाउचर आदि।[web:5]
- होटल, कैब, दूसरी फ्लाइट या किसी और एक्स्ट्रा खर्च की बिल/रसीदें, ताकि कुल नुकसान दिखाया जा सके।[web:5][web:8]
8. आगे के लिए स्मार्ट ट्रैवल टिप्स
फ्लाइट कैंसिलेशन को पूरी तरह कंट्रोल करना आपके बस में नहीं, लेकिन कुछ स्मार्ट स्टेप्स अपनाकर आप रिस्क और फाइनेंशियल लॉस को काफी हद तक कम कर सकते हैं।[web:5][web:18]
- टिकट बुक करते समय हमेशा सही ईमेल–आईडी और मोबाइल नंबर डालें, ताकि कोई भी अलर्ट मिस न हो।[web:5]
- ट्रैवल से 24 घंटे पहले और एयरपोर्ट जाने से ठीक पहले इंडिगो ऐप या फ्लाइट स्टेटस पेज पर अपडेट जरूर चेक करें।[web:16][web:22]
- कनेक्टिंग फ्लाइट्स के बीच पर्याप्त गैप रखें, खासकर पीक सीजन या ऑपरेशनल क्राइसिस के समय।[web:5]
- जहाँ संभव हो वहां रिफंडेबल या फ्लेक्सिबल टिकट लेना, लंबी जर्नी और बिजनेस ट्रैवल के लिए ज्यादा सुरक्षित रहता है।[web:5][web:46]

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